श्री गायत्री चालीसा हिंदी और अंग्रेजी में

The Gayatri Chalisa

Shri Gayatri Chalisa In Hindi and English

श्री गायत्री चालीसा

गायत्री चालीसा के बोल हिंदी और अंग्रेजी में। माँ गायत्री देवी से प्रार्थना। श्री गायत्री चालीसा को पीडीएफ और जेपीजी में डाउनलोड करें।

गायत्री चालीसा (अंग्रेजी)

||दोहा||
!! ह्रीं श्रीं क्लीं मेघ प्रभा जीवन ज्योति प्रचंड,
शांति क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना, शक्ति अखंड,
जगत जननी मंडल, करणी गायत्री सुखधाम, .
प्रणवोम सावित्री स्वधा, स्वाहा पुराण काम। !!

||चोपायी||
!! ॐ भूर् भुवः स्वः युत् जन्नि,
गायत्री नित कलिमल देहानी,
अक्षर चौबीस परम पुनीता,
इन्मेन आधार शास्त्र श्रुति गीता.!!

!! शाश्वत सतोगुणी सतरूपा,
सत्य सनातन सुधा अनूपा।
हंसरोधा सिताम्बर धारी,
स्वर्ण कांति शुचि गगन बिहारी। !!

!! पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला, शुभ,
वर्ण तनु नैन विशाला,
धेयां धरत पुलकित हित कोई,
सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई !!

!! कामधेनु तुम सुर तरु छाया,
निराकार की अद्भुत माया।
तुम्हारी शरण गहे जो को,
तरई सकल संकटा सो सोई। !!

!! सरस्वती लक्ष्मी तुम काली,
दीपे तुम्हारी ज्योति निराली।
तुम्हारी महिमा परास्त न हो,
जो शरद शत मुख गुण दिया। !!

!! चार वेद की मात पुनीता,
तुम ब्रह्माणी गौरी गीता,
महा मंत्र जितने जग माहि,
कोउ गायत्री सम नाहीं। !!

!! सुमिरत हिये में ज्ञान प्रकाशे,
अफसोस पाप अविद्या नासे।
सृष्टि बीज जग जननी भवानी,
काल रात्रि वरदा कल्याणी !!

!! ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जैते,
तुम सो पावे सुरता तेते,
तुम भगतन के भगत तुम्हारे,
जानिहि पुत्र ते प्यारे। !!

!! महिमा अपरम्परा तुम्हारी,
जय जय त्रिपदा भैहारी।
पुरीत सकल ज्ञान विज्ञाना,
तुम सम अधिक ना जग में आना!!

!! तुमहिं जान कछु रहे न शेष,
तुमहिं पाये कछु रहे न कलेसा,
जानन्त तुम्हीं तुम्हीं वहे जाई,
पारस परिस कुधातु सुहाई। !!

!! तुम्हारी शक्ति सब तरफ थी,
माता तुम सब थोर समाई,
गृह नक्षत्र भ्रमंड घनेरे,
अपने पहले प्रयास में आगे बढ़ें। !!

!! सकल सृष्टि प्राण विधाता,
पलक पोषक नाशक त्राता,
मातेश्वरी देया वर्त धारी,
तुम सं तारे पटकी भारी। !!

!! जपर कृपा तुम्हारी हो,
तप कृपा करे सब कोय।
मंद बुद्धि ते बुद्धि बल पावे,
रोगी रोग रहित हो जावे !!

!! दरिद्र माइट कटे सब पीरा,
नशे दुःख हरे भव भीरा,
गृह कलेश चित्त चिंता भारी,
नासे गायत्री भय हरि। !!

!! सन्तति हीन सुसन्तति पावे,
सुख सम्पति युत मोद मनावे,
भूत पिशाच सबे भय खावे
यम के दूत निकट नहीं आवे!!.

!! जो साधव सुमिरे चित, लाय,
अक्षय सुहाग सदा सुखदाई।
घर वर सुख प्रद लहे कुमारी,
विधवा राहय सत्य व्रत धारी। !!

!! जयति जयति जगदम्ब भवानी,
तुम सम और देयलु ना दानी,
जो सतगुरु सो दीक्षा पावे,
तो साधन को सफल बनावे !!
.
!! सुमिरन करे सुरुचि बढभागी,
लहे मनोरथ गृही विरागी।
अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता,
सबा समरथ गायत्री माता. !!

!! ऋषि मुनि यति तपस्वी जोगी,
सो सो मन् वंचित फल पावे,
बल बुद्धि विद्या शील स्वभाऊ,
धन वैभव यश तेज उछाहौ.!!

!! सकल बढे उपजें सुख नाना,
जो यह पथ करे धरि ध्याना। !!
|| दोहा ||
!! यहा चालीसा भगति युत,
पथ करे जो कोई,
तापर कृपा परसनता,
गायत्री की हो. !!

गायत्री चालीसा (हिंदी)

!! ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड,
शान्ति कांति ज्वलंत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड,
जगत जननी मंगल करणी गायत्री सुखधाम,
प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाहा पूर्ण काम !!

!! भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी,
गायत्री नित कलिमल दहनी,
अक्षर चौविस परम पुनीता,
इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता !!

!! शाश्वत सतोगुणी सत रूपा,
सत्य सनातन सुधा अनुना,
हंसारूढ़ सितंबर धारी,
स्वर्ण कांति शुचि गगन-बिहारी !!

!! पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला,
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला,
ध्यान धरत पुलकित हित होई,
सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई !!

!! कामधेनु तुम सुर तरु छाया,
निराकार की अद्भुत माया,
तुम्हारी शरण गहै जो कोई,
तरै सकल संकट सोई !!

!! सरस्वती लक्ष्मी तुम काली,
दिपै तेरे ज्योति निराली,
तुम्हारी महिमा पर न पावैं,
जो शरद शत मुख गुण गावैं !!

!! चार वेद की मात पुनीता,
तुम ब्रह्माणी गौरी सीता,
महामन्त्र संगठन जग माहीं,
कोउ गायत्री सम नहीं!!

!! सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकाशै,
आलस पाप अविद्या नासै,
सृष्टि बीज जग जननी भवनी,
कालरात्रि वरदा कल्याणी !!

!! ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते,
तुम सों पावें सुरता तेते,
तुम भक्तन की भक्ततुम्हारी,
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे !!

!! भगवान अपरम्पार तुम्हारे,
जय जय जय त्रिपदा भयहारी,
शुद्ध सकल ज्ञान विज्ञाना,
तुम सम अधिक न जगमे आना !!

!! तुमहिं जानी कछु रहै न शेषा,
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेसा,
जानत तुमहिं तुमहिं वही जाई,
पारस परसि कुधातु सुखाई !!

!! तुम्हारी शक्ति डूबी सब ठांव,
माता तुम सब ठौर समाई,
ग्रह नक्षत्र ब्रह्माण्ड खण्डरे,
सब गतिवानआपकेप्रीरे !!

!! सकल सृष्टि की प्राण विधाता,
पालक आहारनाश त्राता,
मातेश्वरी दया व्रत धारी,
तुम सन तेरे पातकी भारी !!

!! जापर कृपा करो,
तपार कृपा करें सब कोई,
मंद बुद्धि ते बुद्धि बल पावेन,
रोगी रोग रहित हो जाएं !!

!! दरिद्र मिटै कटै सब पीरा,
नाशै दुःख हरै भव भीरा,
गृह क्लेश चित चिंता भारी,
नासै गायत्री भय हरि !!

!! सन्तति हीन सुसन्तति पावेन,
सुख संपति युत मोद मनावें,
भूत पिशाच सबै भय खावें,
यम के दूत निकट नहीं आवें !!

!! जो सधवा सुमिरें चित लाई,
अछत सुहाग सदा सुखदाई,
घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी,
विधवा रहो सत्य व्रत धारी !!

!! जयति जयति जगदम्ब भवानी,
तुम सम ओर दयालु न दानी,
जो सतगुरु सो देवता पावे,
सो साधन को सफल बनावे !!

!! सुमिरन करे सुरुचि बढभागी,
लहै मनोरथ गृही विरागी,
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता,
सब समर्थ गायत्री माता !!

!! ऋषि मुनि यति तपस्वी योगी,
सो सो मन पेडे फल पावें,
बल बुद्धि विद्या शील स्वभाउ,
धन वैभव यश तेज उछाउ !!

!! सकल बढें उपजें सुख नाना
जे यह पाठ करै धरि ध्याना !!
दोहा
यह चालीसा भक्ति युत पाठ करे जो कोई
तपार कृपा प्रसंता गायत्री की होय

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