Holika Dahan 2026: Lunar Eclipse, Bhadra Shadow, and Auspicious Muhurat

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Rahul Kaushl

February 24, 2026

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    Holika Dahan 2026: Lunar Eclipse, Bhadra Shadow, and Auspicious Muhurat

    होलिका दहन 2026 इस वर्ष कई खगोलीय और धार्मिक कारणों से विशेष महत्व रखता है। होली से एक दिन पूर्व मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

    इस बार चंद्र ग्रहण और भद्रा साया के कारण लोगों के मन में कई सवाल हैं—क्या होलिका दहन सही समय पर होगा? क्या ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा? आइए विस्तार से जानते हैं।

    होलिका दहन का धार्मिक महत्व

    होलिका दहन की कथा प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की भक्ति से क्रोधित होकर उसके पिता हिरण्यकशिपु ने उसे अग्नि में जलाने की योजना बनाई।

    लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई।

    इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जो नकारात्मक शक्तियों के अंत और सकारात्मक ऊर्जा के आरंभ का प्रतीक है।

    होलिका दहन 2026 की तिथि by Pandit.com

    वर्ष 2026 में होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन यानि 3 मार्च को मनाया जाएगा।

    इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाएगी।

    (नोट: सटीक तिथि पंचांग के अनुसार क्षेत्रानुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।)

    होलिका दहन 2026 का संभावित शुभ मुहूर्त by Pandit.com

    होलिका दहन 2026 का संभावित शुभ मुहूर्त by Pandit.com

    होलिका दहन के लिए मुख्य रूप से ये बातों का ध्यान रखा जाता है:

    1. पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो – 3 मार्च 2026
    2. भद्रा समाप्त हो चुकी हो - 01:25 AM to 02:35 AM
    3. रात्रि काल में दहन किया जाए - 06:22 PM to 08:50 PM

    शुभ मुहूर्त सामान्यतः सूर्यास्त के बाद से मध्यरात्रि तक माना जाता है, लेकिन अंतिम निर्णय वार्षिक पंचांग और स्थानीय समय के अनुसार होगा।

    होलिका दहन की पूजा विधि by Pandit.com

    • शुभ मुहूर्त में होलिका की स्थापना करें।
    • रोली, अक्षत, हल्दी, गुड़, नारियल अर्पित करें।
    • परिक्रमा करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
    • गेहूं की बालियाँ (नई फसल) अग्नि में अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भद्रा साया का प्रभाव

    हिंदू पंचांग में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भद्रा के समय होलिका दहन नहीं करना चाहिए।

    • यदि पूर्णिमा तिथि में भद्रा लग रही हो, तो भद्रा समाप्त होने के बाद ही दहन किया जाता है।
    • विशेष रूप से भद्रा मुख के समय दहन वर्जित माना गया है।

    इसलिए होलिका दहन 2026 में सही शुभ मुहूर्त जानना अत्यंत आवश्यक होगा।

    क्या 2026 में चंद्र ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा?

    यदि फाल्गुन पूर्णिमा पर आपके क्षेत्र में चंद्र ग्रहण लगता है, तो धार्मिक दृष्टि से कुछ सावधानियाँ रखी जाती हैं:

    • ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ वर्जित माना जाता है।
    • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का महत्व बढ़ जाता है।
    • यदि ग्रहण का समय होलिका दहन के मुहूर्त से टकराता है, तो ज्योतिषाचार्यों की सलाह अनुसार निर्णय लिया जाता है।

    हालाँकि, ग्रहण हर क्षेत्र में दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं। जहाँ ग्रहण दृश्य नहीं होता, वहाँ सामान्य नियम लागू हो सकते हैं।

    निष्कर्ष

    होलिका दहन 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष रहेगा, विशेषकर यदि चंद्र ग्रहण और भद्रा साया एक साथ पड़ते हैं। इसलिए सही शुभ मुहूर्त जानकर ही दहन करना चाहिए।

    यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची आस्था और सत्य की हमेशा विजय होती है।

    अगर आप चाहें तो मैं शुभ मुहूर्त की सटीक तिथि और समय (शहर अनुसार) भी खोजकर बता सकता हूँ।

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    Rahul Kaushl

    Pt. Rahul Kaushl explains astrology, numerology, and spiritual practices in a way that’s simple, clear, and easy to relate to. He focuses on the why behind rituals instead of blind belief, helping people understand how these ideas actually fit into real life. His teaching feels calm and grounded—less about fear, more about clarity—so things don’t feel heavy or confusing, just practical and reassuring.